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2022-06-09 02:41:43 Blog

God guru brihaspati Vrat Learn Complete Method and Mantra

(भगवान गुरु बृहस्पति व्रत, जानें पूरी विधि और मंत्र) ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति ज्ञान और बुद्धि के दाता माने जाते हैं, जिनकी कृपा से सुख-संपत्ति और सौभाग्य का वरदान मिलता है. यदि आपका भाग्य आपसे रूठ गया है तो उसे मनाने के लिए बृहस्पतिवार व्रत व्रत जरूर करना चाहिए. बृहस्पति को देवताओं का गुरु माना गया है. बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी हैं जो कि ज्ञान और बुद्धि के दाता हैं. इनकी कृपा से सुख-समृद्धि, संतान, धार्मिक कार्य, सौभाग्य और पुण्य फल प्राप्त होता है. देवगुरु बृहस्पति की कृपा होने पर इन सभी सुखों की प्राप्ति होती है लेकिन यदि किसी जातक की कुंडली में बृहस्पति कमजोर हैं या फिर अशुभ फल दे रहे हैं तो उसे जीवन में तमाम तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में उस जातक को देवगृरु बृहस्पति का व्रत, मंत्र जप एवं उनसे संबंधित दान का महाउपाय जरूर करना चाहिए. गुरुवार व्रत की विधि गुरुवार की पूजा विधि-विधान के अनुसार की जानी चाहिए. व्रत वाले दिन सुबह उठकर बृहस्पति देव का पूजन करना चाहिए. बृहस्पति देव का पूजन पीली वस्तुएं, पीले फूल, चने की दाल, मुनक्का, पीली मिठाई, पीले चावल और हल्दी चढ़ाकर किया जाता है. इस व्रत में केले के पेड़ की का पूजा की जाती है. कथा और पूजन के समय मन, कर्म और वचन से शुद्ध होकर मनोकामना पूर्ति के लिए बृहस्पतिदेव से प्रार्थना करनी चाहिए. जल में हल्दी डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाएं. केले की जड़ में चने की दाल और मुनक्का चढ़ाएं साथ ही दीपक जलाकर पेड़ की आरती उतारें. दिन में एक समय ही भोजन करें. खाने में चने की दाल या पीली चीजें खाएं, नमक न खाएं, पीले वस्त्र पहनें, पीले फलों का इस्तेमाल करें.पीले फलों में केले के फल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए पूजन के बाद भगवान बृहस्पति की कथा सुननी चाहिए आइए जानते हैं बृहस्पतिवार व्रत की कथा और उसका महत्व बृहस्पतिवार व्रत की विधि देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए उनका व्रत शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार से प्रारंभ करना चाहिए. इस व्रत को कम से कम 16 व्रत अवश्य करना चाहिए. बहुत से लोग इस व्रत को लगातार तीन साल तक करते हैं. और बृहस्पति के मंत्र की 3 या 11 माला जपें. जब अंतिम बृहस्पतिवार आए तो उस दिन विधि विधान से हवन, पूर्णाहुति के बाद ब्राह्मण को भोजन करायें और अपने सामथ्र्य के अनुसार दान देना चाहिए. बृहस्पति का प्रार्थना मंत्र देवगुरु बृहस्पति की कृपा पाने के लिए उनकी पूजा में नीचे दिये गये प्रार्थना मंत्र को जरूर पढ़ना चाहिए - देवमंत्री विशालाक्षः सदा लोकहितेरतः। अनेकशिष्यैः संपूर्णः पीडां दहतु में गुरुः ।। बृहस्पति का तंत्रोक्त मंत्र बृहस्पति देव का आशीर्वाद पाने के लिए पीपल की समिधा से हवन करना चाहिए और नीचे दिये गये गुरु तंत्रोक्त मंत्र का जाप करना चाहिए. इस मंत्र का 19 हजार बार जप करना चाहिए. ॐ ग्रां ग्रीं प्रौं सः गुरवे नमः । बृहस्पतिवार का महाउपाय 1. बृहस्पतिवार के दिन केसर या फिर हल्दी का तिलक लगाएं. 2. गुरुओं, मंदिर के पुजारी आदि का सम्मान करें और अपने सामथ्र्य के अनुसार उन्हें बृहस्पति से संबंधित चीजों का दान करें. 3. बृहस्पतिवार के दिन केले का पेड़ लगाने और दान करने से भी शुभ फल की प्राप्ति होती है. 4. कुंडली में बृहस्पति को मजबूत बनाने के लिए स्वर्ण के अंदर बृहस्पति रत्न पुखराज को धारण करें

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